इतिहास

भारत की आज़ादी के बाद इस पंचायत का उदय हुआ इस पंचायत में शुरू से ही चार गाँव थे| इसी पंचायत में कुण्डा ऋषि का आश्रम है आलमपुर ग्राम पंचायत पुरुष प्रधान है यह प्रधान कक्षा 8 तक पढ़े हुए है यह फतेहपुर शहर से 23/25 किलोंमिटर की दूरी पर है यहाँ पर आने जाने के लिए संम्पर्क मार्ग बना हुआ है पर यहाँ पर प्राइवेट साधन है! और लोग अपने साधन से आते जाते है इस ग्राम पंचायत में चार गाँव आते है जिसमे आलमपुर ग्राम पंचायत भी सम्मलित है ये सभी गाँव छोटे-छोटे है यहाँ सभी लोग साधारण तौर-तरीके से ही रहते है यहाँ के घर तो पक्के एवम् कच्चे बने है पर उनका रहन-सहन सहदरण ही है लगभग सभी के पास (गाय, भैंस, बकरी, बैल) आदि जानवर भी है| जिनसे कृषि का कार्य किया जाता है| इस पंचायत में पीने के लिए पानी की व्यवस्था अच्छी है जानवरों के लिए तालाब बने हुए है जिनमें गाँव के जानवर पानी पीते है एवं गाँव के बच्चे यहाँ पर नहाते भी है गर्मियों के मौसम में ये तालाब लोगों को काफ़ी राहत देते है|

कांडेपुर:- कांडेपुर गाँव में एक ऋषि रहा करते थे जिनका नाम कुण्डा था और उन्ही ऋषि के नाम पर इस गाँव का नाम कांडेपुर पड़ा, कांडेपुर गाँव फतेहपुर से 23 कि0 मी0 की दूरी पर स्थित है और यहाँ के लोग भी साधारण तौर-तरीके से रहते है एवं अपनी दिनचर्या के अनुसार कार्य करते है इस गाँव में पर्याप्त खेती है जिस में गाँव के लोग खेती करते है और अपना भारण पोषण करते है गाँव के कुछ लोग बाहर जा कर नौकरी भी करते है|

 

 

खेरवा:- यह भी आलमपुर गाँव से 1.5 कि० मी० की दूरी पर बसा हुआ एक छोटा सा गाँव है और यहाँ के लोग भी साधारण तौर-तरीके से रहते है एवं अपनी दिनचर्या के अनुसार कार्य करते है इस गाँव में पर्याप्त खेती है जिस में गाँव के लोग खेती करते है और अपना भारण पोषण करते है गाँव के कुछ लोग बाहर जा कर नौकरी भी करते है|

 

 

 

दौलतपुर:- यह गाँव आलमपुर ग्राम से 2 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है और यहाँ के लोग भी साधारण तौर-तरीके से रहते है एवं अपनी दिनचर्या के अनुसार कार्य करते है इस गाँव में पर्याप्त खेती है जिस में गाँव के लोग खेती करते है और अपना भारण पोषण करते है गाँव के कुछ लोग बाहर जा कर नौकरी भी करते है|

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